कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

आर्य समाज अँधेरी द्वारा प्रस्तुत वेबसाइट के निर्माण का मुख्य उद्देश्य ईश्वरीय ज्ञान वेद और वैदिक साहित्य का जन-साधारण में प्रचार करना हैं |

वैदिक साहित्य में कीसी भी अंश का ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा कीसी को हो तो वह उसी अंश को आपने घर बैठे इस अल्प मूल्य और समय में प्राप्त कर सकता हैं |

इसी श्रेष्ठ कामना के साथ हम इस पुण्य कार्य में धर्म प्रेमी सज्जन से तन-मन एवं धन से सहायता की अपील करते है | क्योंकि इस विस्तृत कार्य हेतु अत्यधिक धन की आवश्यकता होगी |

आपके सुझाव भी आमन्त्रित हैं ताकि और सुधार हो सके|

संगठन

संगठन

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा संवत् 1931 तदनुसार 7 अप्रैल 1875 में मुंबई में महर्षि दयानंद सरस्वती ने आर्यसमाज की स्थापना की | आर्यसमाज (काकडवाडी) मुंबई विश्व का सर्वप्रथम आर्यसमाज है |

इस समय आर्यसमाज की विचारधारा से प्रभावित व्यक्तियों की संख्या 10 करोड़ है तथा आर्यसमाज के सदस्यों की संख्या पांच लाख है | संपूर्ण विश्व में 200 जिला सभाएं, 50 प्रांतीय प्रतिनिधि सभाएं तथा एक सर्वोच्च शिरोमणी सभा सार्वदेशिक आर्यप्रतिनिधि सभा दिल्ली में है |

आर्यसमाज की मान्यताओं के प्रचार-प्रसार के लिए 3500 अवैतनिक तथा 1500 वैतनिक उपदेशक है - जो अहर्निश प्रचार कार्य में संलग्न हैं | आर्यसमाज की मासिक-पाक्षिक साप्ताहिक पत्र-पत्रिकाओं की संख्या 120 हैं | आर्यसमाज के साहित्य को प्रकाशित करने में 55 पुस्तक प्रकाशक निरंतर लगे हुए हैं | शिक्षा के कार्य में आर्यसमाज का अदभुत् योगदान है | इसके 1600 प्राथमिक विद्यालय, 1200 माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालय, तथा 500 महाविद्यालय, 160 गुरुकुल, 250 कन्या महाविद्यालय, तथा 150 पुत्री पाठशालाएं शिक्षाकार्य में संलग्न हैं |

आर्यसमाज का शिक्षा पर प्रतिवर्ष 25 अरब रुपये खर्च होता है | अनाथ बच्चों के पालन पोषण के लिए 50 बाल सदन कार्य कर रहे हैं | विधवाओं के जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए 50 नारी सदन बने हुए हैं | चार विश्वविद्यालयों में आर्यसमाज के सिध्दातों पर शोध करने के लिए दयानंद शोधपीठ की स्थापना हो चुकी है - जिसमें अनेक शोधकर्ता कार्यरत हैं | आर्यसमाज से संबंधित विषयों पर लगभग 150 व्यक्तियों ने शोधकार्य करके पी.एच.डी. की उपाधी ली है | हरिद्वार में गुरुकुल कांगडी विश्वविद्यालय कार्यरत है |

अजमेर व रोहतक में दो विश्वविद्यालय महर्षि दयानंद सरस्वती के नाम पर चल रहे हैं |आज के नवयुवकों की जीवन का सही मार्ग निर्देश करने के लिए 550 आर्यवीर दल की शाखाएं देश-विदेश में लगती हैं | मनुष्यों की चिकित्सा सेवा के लिए लगभग 1000 धर्मार्थ औषधालय चल रहे हैं

मान्यताएं

मान्यताएं

आर्य का अर्थ है श्रेष्ठ | आर्यसमाज का अर्थ है श्रेष्ठ व्यक्तियों का समाज संगठन | बुराईयों को छोडकर अच्छाई ग्रहण करने की इच्छा करनेवाला हर व्यक्ति इस संगठन का सदस्य बन सकता है |

श्रेष्ठ व्यक्तियों के समुदाय को दृढ़ रखने के लिए महर्षि दयानंद ने इसके दस नियम बनाये जो आर्य-समाज के नियम के रूप में जाने जाते है| जिससे आर्यसमाज के उदेश्य व सदस्यों के कार्यक्रमों का बोध होता है |

वेद आर्यसमाज का मूल ग्रंथ हैं | वेदानुकुल शास्त्र यथा उपनिषद, छ:दर्शन, ब्राह्मण ग्रंथ, विशुद्ध रामायण, महाभारत व मनुस्मृति को आर्यसमाज मानता है | आर्यसमाज ईश्वर को सर्वव्यापक एवम् निराकार मानता है |

आर्यसमाज प्राचीन वैदिक संस्कृति, संस्कार व नैतिकता को बढावा देता है | आर्यसमाज अंधविश्वास, कुरीतियों, पाखंडों को नही मानता | यह समाज सुधारक संगठन है | किसी भी प्रकार के व्यसन का विरोधी है यथा मांसाहार, शराब, सिगरेट, चाय, गुटखा, तम्बाकू का निषेध करता है |

संगठन सूक्त

संगठन सूक्त

ओ३म्‌ सं समिधवसे वृषन्नग्ने विश्वान्यर्य आ |
इड़स्पदे समिधुवसे स नो वसुन्या भर                            |१| 

         हे प्रभो ! तुम शक्तिशाली हो बनाते सृष्टि को ||
         वेद सब गाते तुम्हें हैं कीजिए धन वृष्टि को ||

ओ३म सगंच्छध्वं सं वदध्वम् सं वो मनांसि जानतामं |
देवा भागं यथा पूर्वे सं जानानां उपासते               |२| 

       प्रेम से मिल कर चलो बोलो सभी ज्ञानी बनो |
       पूर्वजों की भांति तुम कर्त्तव्य के मानी बनो ||

समानो मन्त्र:समिति समानी समानं मन: सह चित्त्मेषाम् |
समानं मन्त्रमभिमन्त्रये व: समानेन वो हविषा जुहोमि    |३|

      हों विचार समान सब के चित्त मन सब एक हों |
     ज्ञान देता हूँ बराबर भोग्य पा सब नेक हो ||

ओ३म समानी व आकूति: समाना ह्र्दयानी व: |
समानमस्तु वो मनो यथा व: सुसहासति             |४|

     हों सभी के दिल तथा संकल्प अविरोधी सदा |
    मन भरे हो प्रेम से जिससे बढे सुख सम्पदा ||

सुविधाऎं

सुविधाऎं

1 आर्य समाज मन्दिर में हवन मुण्डन नामकरण विवाह आदि शुभ कार्य गृहप्रवेश व्यापार वृद्धि हेतु वैदिक विधि से पूजा की व्यवस्था हेतु पुरोहितों की भी व्यवस्था है जिनको आप अपने घर के व्यापार के किसी भी शुभ कार्य में आमन्त्रित कर उनकी सेवाओं का लाभ उठा सकते है |

2 आर्य समाज में दीन दुखी असहायों की सहायता हेतु एम्‍बुलैन्स की व्यवस्था है |

3 विवाह, जन्मदिन, शोकसभा, एवं अन्य वैदिक कार्यो हेतु 100 से 150 व्यकतियों की क्षमता वाला सुन्दर हॉल है |

4 विवाह के पश्‍चात विवाह प्रमाण प्रत्र भी प्रदान करते है |

5 विवाह हेतु अच्छे गुण कर्म स्वभाव के अनुसार लडके व लडकियो का मिलन मैरिज ब्यूरो द्वारा होता है |

सम्पर्क करे आर्य समाज अन्धेरी
 

फोन न. २६३९३८९५ (Phone: 26393895)
 

पुरोहित
प. प्रकाश चन्द्रजी ९८२१५२७७७९ - Pandit Prakash Chandraji 9821527779
प. सुखवीर शा स्त्री ९८२१७६२३७६ - Pandit Sukhvir Shastri 9821762376 
आचार्य हरिओम ९८२०८९१९८५ - Acharya Hariomji 9820891985

मुख्य उपलब्धियाँ

मुख्य उपलब्धियाँ

वेद की गरिमा आर्यसमाज ने ही बढाई है | महर्षि दयानंद ने वेद का भाष्य कर सही अर्थ प्रस्तुत किये |

स्त्रियों को समाज में फिर सम्मानजनक स्थान महर्षि दयानंद के प्रयत्नों से ही मिला | बाल विवाह निषेध, स्त्री शिक्षा, विधवा विवाह के कार्यों को सफलता पूर्वक आर्यसमाज ने कर दिखाया है |

समाजसुधार के व्यापक आदोंलनों में आर्यसमाज को सर्वप्रथम सफलता मिली है | आर्यसमाज हमेशा समाज सेवा के कार्यो में अग्रणी रहा है प्राकृतिक आपत्ति के समय उसने अपने पुनीत कर्तव्य का निर्वाह किया है | सन् 2000 में सौराष्ट्र में सूखा राहत कार्य पर 75 लाख रुपये खर्च किये | मोरबी बाढ़, लातूर भूकंप, कांडला तूफान, कारगिल युद्ध, उडीसा तूफान, गुजरात के भूकंप-मुंबई की बाढ हमेशा आर्यसमाज ने सेवा की है |

विधर्मियों द्वारा किये जा रहे व्यापक धर्म परिवर्तन को रोककर लाखों हिंदुओं को मुसलमान व ईसाई बनने से रोका है | इतना ही नहीं तत्कालीन कट्टर हिंदुओं के विरोध के बावजूद लाखों बिछुडे भाईयों को मुसलमान/ईसाई में से फिर हिंदू बनाया है यह कार्य अभी भी जोरों से चल रहा है | इस कार्य से आज हिंदू प्रजा सुरक्षित है |

राष्ट्रवादी संगठन होने के कारण आर्य समाज ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रियता से भाग लिया | लाला लाजपतराय, पं रामप्रसाद बिस्मिल वीर भगतसिंह, भाई परमानंद, स्वामी श्रध्दानंद जैसे अनेक सपूत आर्य समाज की ही देन थे | स्वतंत्रता सेनानियों में 85% आर्यसमाजी थे |

शिक्षा के प्रचार में आर्यसमाज का कार्य बेमिसाल रहा है |

भावी योजना

भावी योजना

१. वैदिक विचार धारा का अधिक से अधिक प्रचार प्रसार
२. धन संग्रह कर गुरुकुलो एवं अनाथालय गौशालाओ का सहयोग
३. बीमार दुखी असहाय हेतु एम्बूलेन्स
४. जिन वैदिक विद्वानो एवं प्रचारको ने अपना तन मन धन समाज के लिये समर्पित किया उनके लिये अक्षय कोष
५. प्रत्येक घर यज्ञ ज्योती को जलाना
६. बच्चो मे अच्छे संस्कार अच्छे विचारों को बढाना
७. आर्य वीर दल का गठन
८. वृद्धो के लिये आवासिय व्यवस्था

इन सभी योजनाओं में बहुत धन की आवश्यता होगी अत: आप हमारा तन मन धन से सहयोग कर पुण्य के भागी बने |
 

आर्यसमाज के नियम

आर्यसमाज के नियम

1. सब सत्यविद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं, उन सब का आदिमूल परमेश्वर है |

2 ईश्वर सच्चिदानन्दस्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान्, न्यायकारी, दयालु, अजन्मा, अनन्त, निर्विकार, अनादि, अनुपम, सर्वाधार, सर्वेश्वर, सर्वव्यापक, सर्वार्न्त्यार्मी, अजर, अमर, अभय, नित्य, पवित्र और सृष्टिकर्ता है | उसी की उपासना करनी योग्य है |

3 वेद सब सत्यविद्याओं का पुस्तक है | वेद का पढना-पढ़ाना और सुनना-सुनाना सब आर्यों का परम धर्म है |

4 सत्य के ग्रहण करने और असत्य के छोड़ने में सर्वदा उद्यत रहना चाहिए |

5 सब काम धर्मानुसार अर्थात् सत्य और असत्य को विचार करके करने चाहिए |

6 संसार का उपकार करना इस समाज का मुख्य उद्देश्य है अर्थात् शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक उन्नति करना |

7 सबसे प्रतिपूर्वक धर्मानुसार यथायोग्य वर्तना चाहिए |

8 अविद्या का नाश और विद्या की वृद्धि करनी चाहिए |

9 प्रत्येक को अपनी ही उन्नति से सन्तुष्ट न रहना चाहिए किन्तु सबकी उन्नति में अपनी उन्नति समझनी चाहिए |

10 सब मनुष्यों को सामाजिक सर्वहितकारी नियम पालने में परतन्त्र रहना चाहिए और प्रत्येक हितकारी नियम में सब स्वतन्त्र रहें |

दैनिक यज्ञ

दैनिक यज्ञ

यज्ञो के श्रेष्टतमम कर्म

यज्ञ संसार का सबसे श्रेष्टतम कर्म है ।

क्योकि इसके करने से जल ओर वायु की शुर्द्धि होती है एवं मन के अन्दर पवित्र विचार पवित्र भावनायें एवं अच्छे संस्कार जाग्रत होते है । वेद शास्तो्त्रोमें भी यज्ञ की महिमा का व्याख्यान है गीता में भी भगवान कृष्ण ने कहा है कि जो व्यक्ति यज्ञ ना करके भोजन करता है उसके सारे पुण्य नष्ट हो जाते है भगवान राम भी नित्यप्रति यज्ञ किया करते थे वेदो में कहा है

अयं यज्ञो भुवनस्य नाभि: यह यज्ञ हो इस संसार का केन्द्र है इसलिए इस यज्ञ रूपी पवित्र कर्म से जोड़ने के लिये आर्य समाज अन्धेरी मे नित्यप्रति प्रात:- 7:30 से 8:30 तक यज्ञ होता है |

इसमें किसी भी धर्मं मत मजहब के लोग निसंकोच आ सकते है जिसका कोई चार्ज नही है यदि आप कुछ यज्ञ हेतु सहयोग करना चाहते हो तो आपकी स्वेच्छा है |

आप सभी हमारे यहाँ सादर आमंत्रित है |

साप्ताहिक सत्संग

साप्ताहिक सत्संग

दुनिया मे भले या सत्पुरुषो का मेल औषध का कार्य करता है शारीरिक विकारो का इलाज वैध या डाँक्टरों द्वारा हो सकता है किन्तु आध्यात्मिक भोजन सत्संगों से ही प्राप्त होता है इतिहास साक्षी है कि कभी सत्पुरुषो के मेल से जीवन की राह ही बदल जाती है सत्संग हमारे मन पर पडे हुये जन्म जन्मान्तरों के विषय वासना रुपी मैल को हटाकर शुद्ध ज्ञान एवं परमेश्‍वर की भक्ति के साथ जोडता है सत्संग और स्वाध्याय श्रेष्ठ विचार धारा के लिये आक्सीजन का काम करते है इसलिये सत्संग सुनने का अवसर जब मिले तब परिवार सहित पति-पत्नी, बच्चे, माता-पिता, भाई-बहन, रिश्तेदार, सबको लेकर सत्संग का आनंन्द उठाये इससे बढकर पुण्य कार्य और कोई नहीं हो सकता ।

अगर आप चाह्ते हो कि घर में पति-पत्नी में प्यार बना रहे बच्चे बडों की तथा माता पिता की इज्जत करें घर में खुशहाली रहे सब सुख चैन से जियें तो बच्चों सहित पूरे परिवार को सत्संग में जरुर ले जाना चाहिये सत्संग में जाने से बुरे से बुरे लोग भी संत बन जाते है यदि श्रेष्ढ लोग सुनेगे तो क्या देवता नहीं बन जायेंगे अपने परिवार को स्वर्ग जैसा सुन्दर बनाने के लिये सत्संग से बढकर और कोई उपाय नही है अतः मानव मात्र के क्ल्याण के लिये दुनिया भर मे आर्य समाजों में सत्संग की व्यवस्था है आर्य समाज अन्धेरी में प्रति रविवार प्रातः 9.00 बजे से 11.00 बजे तक होता हें जिस्में साप्ताहिक सत्संग, यज्ञ, भजन, प्रवचन की व्यवस्था है हमारे साप्ताहिक सत्संग में वैदिक दार्शनिक विद्धानों का आगमन होता है जिनके प्रवचनो को सुनकर आप अपने जीवन श्रेष्ढ बना सकते हौ अतः आप परिवार सहित अवश्य पधारें आर्य समाज अन्धेरी आपका स्वागत धन्यवाद करती है।

महिला सत्संग

महिला सत्संग

अन्धेरी आर्य समाज में गुरुवार साय 3 से 5 बजे तक महिला सत्संग आयोजित होता है जिसमे यज्ञ, भजन, प्रवचन, की व्यवस्था है

माता निर्माता भवति

माता परिवार का निर्माण करने वाली होती है यदि मातायें बहनें अच्छे संस्कारो से युक्त होगी तो निश्चित रूप से परिवार की सन्तति भी अच्छे गुण कर्म स्वभाव से युक्त होगी इसी उद्द्देश्य की पूर्ति के लिए महिला सत्संग का अयोजन होता है अतः इस व्यवस्था का लाभ आप सभी महिलायें उठा सकती है सत्संग के माध्यम सें जीवन जीने की कला सीख अपने जीवन व परिवार के सुखों को बढाकर धर्म लाभ उठा सकती है अतः आप सभी आमन्त्रित है

मैरिज ब्यूरो : Marriage Bureau

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"Dedicated to Excellence in Social Service"

Arya Samaj Andheri is an institution dedicating its decades of experience of enabling happy marriages to you. We believe that with changing times, the traditional matrimony process has to incorporate the mindset of the present generation while retaining family values and traditions. The ideal match should therefore be compatible in most respects. We present our comprehensive solution by way of an interactive mobile application and personalized services to ensure that your matrimony search experience is purposeful practical and pleasant.

Arya Samaj Andheri has created a pious environment from where the matrimony service is conducted. You may visit the samaj premises and complete the registration formalities. You can check out the profiles where physical registrations are filed. Our team is available to interact with you and understand your requirements and suggest an appropriate service. For a token fee of Rs. 3,100 you can enjoy host of services.

Discover Connect Explore and Commit through our Interactive Mobile App. Your registration comes with the unique benefit of a fully responsive mobile application. We have created a secure environment where our members can discover partner profiles on our app and initiate connections with real time conversations with the prospects.

Your registration gives you access to our fully integrated website where you can get a snapshot of the listed profile details and get a facility of an advanced search where you can discover profiles who match your search criteria. In case you are unable to visit us personally, you can fill in a basic form on the site and we will call you back and complete your registration formalities. Talk to us.

We are happy to extend our assisted matrimony services where we bring in our years of experience to your matrimony process. We will understand your requirements, suggest matching profiles after carefully evaluating your criteria and mutual consultations on a right fit. We will reach out to the prospective parents and / profiles and mediate a meeting to take your discussions forward and help you in every subsequent step. Please contact us for further information in this regard.

Please note, Arya Samaj Marriage Bureau announces a confidential Matrimonial Service. Mrs. Sushma Arya has taken the project under her leadership. She is available on phone 65289415 and mobile no. 9833126336.

For more information please contact us:
- Every Thursday from 5pm to 7pm

- Every Sunday from 11pm to 1pm.
- Phone 65289415

For Frequently Asked Question on Marriage Bureau, please click here.

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योगा क्लास

योगा क्ला

मानव का शरीर साधन है परमेशवर को प्राप्त करने का "आत्मानं रथिनं विदी शरीर रथ भेव च" आत्मा रथी है। शरीर रथ है। आत्मा शरीर पर सवार होकर ही परमात्मा को प्राप्त करता है। स्वस्थ शरीर से ही हम परमात्मा के परमानद को प्राप्त कर सकते है। सांसरिक सुखो को भी प्राप्त करने के लिये भी स्वस्थ शरीर का होना आवश्यक है। योगाभ्यास स्वं योगासन के द्वारा ही हम शरीर को स्वस्थ एवं निरोग रख सकते है। योग के द्वारा हमें रोग से मुक्ति मिलती है योग के द्वारा अल्लस्य प्रमाद दूर होता है। शरीर स्फ़ूर्तिमय बना रह्ता है। मानसिक समस्याओ को दूर कर मन को प्रसन्नतासे भरत है। योग के द्वारा हम भयंकर से भयंकर रोगो को दूर कर सकते है। डायबटिज ब्लड्प्रेशर अस्थ्मा गैस स्वं पेट के विकार, मोटापा थाइराइड गठियावाय सोरामसीस ह्रदय रोग आदि प्रमाणित रुप से योग एवं आयुर्वेद के द्वारा दूर कर सकते है। योग जीवन के लिये कवच का काम करता है। आर्यसमाज अन्धेरी में प्रात: ६.१५ मंग बुध एवं शुक्र्वार सांय - ५.०० से ६.०० सोम गुरु एवं शनिवार प्रतिदिन १२.०० से १.०० अनुभवी योगाचार्या द्वारा योग सिखाया जाता है। आप साभी योग क्लास मे आकर अप्मे जीवन को स्वस्थ एवं निरोग बनासकते है।

वार्षिक उत्सव

वार्षिक उत्सव

आर्य समाज अन्धेरी अपना वर्षिक उत्सव दिसम्बर महिने के अन्तिम सप्ताह मे बडे हर्षाल्लाप्त के साथ २१ कुण्डीय महायज्ञ के रुप मे मनाती है आर्य समाज के उद्द्देश्यों में महर्षि दयानन्द सरस्वती जी द्वारा निर्दशित नियमानुसार संसार का उपकार करना ही हमारा परम लक्ष्य है। इसे द्रष्टि गत रखते हुए ही सारीरिक, आत्मिक और सामाजिक उन्नतिको ध्यान में रख कर वेद प्रवचन, यज्ञ, मधुर भक्ति संगीत का विराट आयोजन किया जाता है।
 
इस महानगर मुम्बई के व्यस्त जीवन में आध्यात्मिक शान्ति प्राप्त करने का अवसर मिलना कठिन प्रतीत होता है। सुख-शान्ति समॄद्धि की कामना ही हमारे जीवन का उद्द्देश्य है। इस पावन यज्ञ के कार्यक्रम में हम आपके समस्त परिवार एवं राष्ट्र उन्नति की कामना से ही महायज्ञ का आयोजन करते है।
 
इस महायज्ञ में ब्रह्मत्व के लिए भारत के सुप्रसिध्ध वैदिक, दशनिक विद्धानो को विशेष रुप से आमन्त्रित करते है। इस आयोजन में आप स्वयं एवं अपने समष्त इष्ट मित्रो व बन्धु बान्धवों को इस शुभ अवसर का लाभ प्राप्त कराकर पुण्य के भागी बन सक्ते है।
 
 

( श्रावणी पर्व )

श्रावणी पर्व

यह पर्व अग्स्त मास मे मनाते है । वेद का पढ्ना-पढाना और सुनना-सुनाना सब आर्यो का परम धर्म है। श्रावणी उपाकर्म का सामान्य अर्थ है वेदाध्ययन करना वेदाध्ययन के लिये प्र्व्रुत होना यह हमारा परमधर्म है। एक धर्म होता है दूसरा परमधर्म । एक आत्मा होता है दूसरा परमात्मा। इसका भेद स्पष्ट करने के लिये यह पर्याप्त है।

एक दुकानदार इमानदारी से दाम बताता है वह मूह मागें दाम लेता है यह उसका धर्म है। वह सही तौलता है , सही चीज देता है ग्राहक को धोखा नही देता है बुरा नही चाह्ता है यह उसका परम धर्म है। बस वेदों मे यही कहा है - तू मनुष्य बन, अपना कल्याण कर, पडॊसी का कल्याण कर, राष्ट्र का कल्याण कर सारे संसार का उपकार कर। वेद कथा का आयोजन हम यही सीखने सिखाने के लिये करते है । जिसमें सम्मलित होकर आप सभी धर्मलाभ उठा सकते है अत: आप सादर आमन्त्रित है॥
 
 

मैरिज ब्यूरो : Marriage Bureau

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1. How do I become a member?
Ans: Register your self by filling the form. After you submit then you will get information as to how to proceed.

2. Where are my e-mail messages sent?
Ans: All messages generated are sent to your registered email address.

3. I am not getting good response from this site, What can I do?
Ans: Improve your profile by writing something interesting, upload a different photograph. Mail as many people as you can. Visit the site frequently to find new added member.

4. Do you offer free membership?
Ans: No, the charges are nominal to support the administrative work.

5. What is the registration fee?
Ans: Registration charges are Rs 500 and form is valid for the whole year after that you have to renew.

6. How do I upload my photograph?
Ans: You can upload your photograph in your account settings. Go to my account, there you will see the link to upload your photograph, follow the instructions.

Please note, Arya Samaj Marriage Bureau announces a confidential Matrimonial Service. Mrs. Sushma Arya has taken the project under her leadership. She is available on phone 65289415 and mobile no. 9833126336.

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Contact Arya Samaj Andheri

१२०, आराम नगर - १,
सात बंगला, अंधेरी (प),
मुंबई - ४०० ०६१.

दूरभाष - २६३९३८९५ - ६५२८९४१५

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आचार्य हरिओम ९८२०८९१९८५ - Acharya Hariomji 9820891985
प. प्रकाश चन्द्रजी ९८२१५२७७७९ - Pandit Prakash Chandraji 9821527779
प. सुखवीर शास्त्री ९८२१७६२३७६ - Pandit Sukhvir Shastri 9821762376 

२६ वाँ वार्षिकोत्स् व

  • गुरुवार २० से रविवार २३ दिसंबर २०१२ तक
  • प्रात: ७.०० से ९.३० सयं ८.०० से १०.००
  • लोखंडवाला गार्डन नं. २, अंधेरी (प), मुंबई - ४०० ०६१.
  • दूरभाष - २६३९३८९५ - ६५२८९४१५
२१ कुण्डिय चतुर्वेदीय शतक महायज्ञ

२०-१२-२०१२ गुरुवार - प्रात: ७.०० बजे

यज्ञ का शुभारम्भ एव्म दीप प्रज्वलन

मुख्य अतिथि

श्री सुनील मानकताला (उध्योगपति)

विशेष अतिथि

श्री अजय कौल (समाजसेवी)


प्रात: कलीन सत्र

गुरु, शुक्र, शनिवार २०, २१, २२ दिसम्बर २०१२

  • ७.०० बजे से ८.००: चतुर्वेदिय महायज्ञ - ब्रह्मा - आचर्य श्री अखिलेश्वरजी (हरिद्वार)
  • ८.०० बजे से ८.४५: भजन - श्री कंचन कुमारजी (दिल्ली)
    वेदपाठी
    कन्या गुरुकुल चोटिपुरा की कन्याए
  • ८.४५ बजे से ९.३०: प्रवचन
  • ९.३० बजे से : ध्वजरोहण - श्री ज्ञानचन्द्र जि कुमार
  • १०.०० बजे: अल्पाहार

सायं कालीन सत्र

गुरु, शुक्र, शनिवार २०, २१, २२ दिसम्बर २०१२

  • ८.०० बजे से ९.००: भजन
  • ९.०० बजे से ९.४५: प्रवचन
  • ९.४५ बजे: प्रीति भोज

रविवार २३ दिसम्बर २०२०१२ सत्र

  • ८.०० बजे से ९.०० : महायज्ञ
  • ९.०० बजे से १०.०० : पूर्णाहुति एवं आशीर्वाद
  • १०.०० बजे: प्रात्राश (अल्पाहार)