Arya Samaj : Andheri

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा संवत् 1931 तदनुसार 7 अप्रैल 1875 में मुंबई में महर्षि दयानंद सरस्वती ने आर्यसमाज की स्थापना की | आर्यसमाज (काकडवाडी) मुंबई विश्व का सर्वप्रथम आर्यसमाज है |

 

इस समय आर्यसमाज की विचारधारा से प्रभावित व्यक्तियों की संख्या 10 करोड़ है तथा आर्यसमाज के सदस्यों की संख्या पांच लाख है | संपूर्ण विश्व में 200 जिला सभाएं, 50 प्रांतीय प्रतिनिधि सभाएं तथा एक सर्वोच्च शिरोमणी सभा सार्वदेशिक आर्यप्रतिनिधि सभा दिल्ली में है |

 

आर्यसमाज की मान्यताओं के प्रचार-प्रसार के लिए 3500 अवैतनिक तथा 1500 वैतनिक उपदेशक है - जो अहर्निश प्रचार कार्य में संलग्न हैं | आर्यसमाज की मासिक-पाक्षिक साप्ताहिक पत्र-पत्रिकाओं की संख्या 120 हैं | आर्यसमाज के साहित्य को प्रकाशित करने में 55 पुस्तक प्रकाशक निरंतर लगे हुए हैं | शिक्षा के कार्य में आर्यसमाज का अदभुत् योगदान है | इसके 1600 प्राथमिक विद्यालय, 1200 माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालय, तथा 500 महाविद्यालय, 160 गुरुकुल, 250 कन्या महाविद्यालय, तथा 150 पुत्री पाठशालाएं शिक्षाकार्य में संलग्न हैं |

 

आर्यसमाज का शिक्षा पर प्रतिवर्ष 25 अरब रुपये खर्च होता है | अनाथ बच्चों के पालन पोषण के लिए  50 बाल सदन कार्य कर रहे हैं |  विधवाओं के जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए 50 नारी सदन बने हुए हैं | चार विश्वविद्यालयों में आर्यसमाज के सिध्दातों पर शोध करने के लिए दयानंद शोधपीठ की स्थापना हो चुकी है - जिसमें अनेक शोधकर्ता कार्यरत हैं | आर्यसमाज से संबंधित विषयों पर लगभग 150 व्यक्तियों ने शोधकार्य करके पी.एच.डी. की उपाधी ली है | हरिद्वार में गुरुकुल कांगडी विश्वविद्यालय कार्यरत है |

 

अजमेर व रोहतक में दो विश्वविद्यालय महर्षि दयानंद सरस्वती के नाम पर चल रहे हैं |

आज के नवयुवकों की जीवन का सही मार्ग निर्देश करने के लिए 550 आर्यवीर दल की शाखाएं देश-विदेश में लगती हैं | मनुष्यों की चिकित्सा सेवा के लिए लगभग 1000 धर्मार्थ औषधालय चल रहे हैं

 

For more info: Acharya Hariomji 9820891985
 
 
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