Arya Samaj : Andheri
 

आर्य का अर्थ है श्रेष्ठ | आर्यसमाज का अर्थ है श्रेष्ठ व्यक्तियों का समाज संगठन | बुराईयों को छोडकर अच्छाई ग्रहण करने की इच्छा करनेवाला हर व्यक्ति इस संगठन का सदस्य बन सकता है |

 

श्रेष्ठ व्यक्तियों के समुदाय को दृढ़ रखने के लिए महर्षि दयानंद ने इसके दस नियम बनाये जो आर्य-समाज के नियम के रूप में जाने जाते है| जिससे आर्यसमाज के उदेश्य व सदस्यों के कार्यक्रमों का बोध होता है |

 

वेद आर्यसमाज का मूल ग्रंथ हैं | वेदानुकुल शास्त्र यथा उपनिषद, छ:दर्शन, ब्राह्मण ग्रंथ, विशुद्ध रामायण, महाभारत व मनुस्मृति को आर्यसमाज मानता है | आर्यसमाज इश्वर को सर्वव्यापक एवम् निराकार मानता है |

 

आर्यसमाज प्राचीन वैदिक संस्कृति, संस्कार व नैतिकता को बढावा देता है | आर्यसमाज अंधविश्वास, कुरीतियों, पाखंडों को नही मानता | यह समाज सुधारक संगठन है | किसी भी प्रकार के व्यसन का विरोधी है यथा मांसाहार, शराब, सिगरेट, चाय, गुटखा, तम्बाकू का निषेध करता है |

 

 
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