Arya Samaj : Andheri
 

ओ३म्‌ सं समिधवसे वृषन्नग्ने विश्वान्यर्य आ |
इड़स्पदे समिधुवसे स नो वसुन्या भर                            |१| 

         हे प्रभो ! तुम शक्तिशाली हो बनाते सृष्टि को ||
         वेद सब गाते तुम्हें हैं कीजिए धन वृष्टि को ||

ओ३म सगंच्छध्वं सं वदध्वम् सं वो मनांसि जानतामं |
देवा भागं यथा पूर्वे सं जानानां उपासते               |२| 

       प्रेम से मिल कर चलो बोलो सभी ज्ञानी बनो |
       पूर्वजों की भांति तुम कर्त्तव्य के मानी बनो ||

समानो मन्त्र:समिति समानी समानं मन: सह चित्त्मेषाम् |
समानं मन्त्रमभिमन्त्रये व: समानेन वो हविषा जुहोमि    |३|

      हों विचार समान सब के चित्त मन सब एक हों |
     ज्ञान देता हूँ बराबर भोग्य पा सब नेक हो ||

ओ३म समानी व आकूति: समाना ह्र्दयानी व: |
समानमस्तु वो मनो यथा व: सुसहासति             |४|

     हों सभी के दिल तथा संकल्प अविरोधी सदा |
    मन भरे हो प्रेम से जिससे बढे सुख सम्पदा ||

 

 

 
For more info: Acharya Hariomji 9820891985
 
 
Designed by Web Avataar